Tuesday, January 19, 2010

तेरे वादे, tere waade

अपने वादों की अहमियत जान
तेरी जुबाँ की क्या कीमत होगी
मैंने सहा है, और सह जाऊँगा
वो पूछेगा, तुम्हे जहमत होगी।

तेरी इक हाँ, teri ik haan

तेरी इक हाँ के लिए हमने कितनी ना सुनी
जाँ तुझे जाना पर कितनी तेरी बात सुनी।

इश्क, ishk

इश्क पर क्या करूँ कविता
बहुत कर गए ग़ालिब
ये दौर नहीं है जश्न का
चर्चा क्या हो हुश्न का।

मुहब्बत का सौदा, muhabbat ka sauda

तेरी मुहब्बत में
गैरत कभी कुछ कम सी हुई
कुछ पाने को कुछ खोने का हिसाब
अब ये महंगा लगता है.

बाइज्जत, baaijjat

उनकी बातें ना कर
सामने तेरे जो सजदा होते हैं
मुझसे मिलना है तो बाइज्जत मिल
बदले में इज्ज़त देंगे वादा करते हैं.

इश्क और इमान, ishk aur imaan

ये कौन मुंआ कह गया
इश्क में सब जायज है
हम तो मुहब्बत भी
इमान से करते हैं.

कवच, kavach

तुम कवच न पहनो
जंग लग जाएगा
तुम्हारे चेहरे पर फब्ती ओस की
उस से बनती नहीं।

तेरी हर नहीं, Teri har nahin

तुम्हारी हर 'नहीं' सीने में छुरी सी लगी
कितनी बाकी है बता दो
मै भी बची पसलियों का हिसाब कर लूँ।