Tuesday, July 26, 2011

तुम्हे देखकर

तुम्हे देखकर
एक इमारत  याद आती है.
ताजमहल जो
जमी फाड़कर उछला फव्वारा है
या रति के हाथ से फिसलता झरना.
जिसका पानी यमुना में जा मिलता है.

तुम्हे देखकर यमुना की याद आती है
जो बह रही चुपचाप
राजा रानी की प्रणय साँसे सुनती हुई
जिनका भेद वो कभी न खोलेगी .

यमुना जो वैसी रही होगी कभी
जिसमे तुम्हारी  परछाई दिखती होगी.

Sunday, July 24, 2011

फिर से माधुरी

मुझे याद है माधुरी
जेल के बाहर खड़ी हुई
छरहरी लड़की
चेहरे पर जिद के निसान थे
मुझे याद है माधुरी
तहसील के दफ्तर में
बोलती हुंकारती लडती
साथिओ के हक़ दाव पर थे
मुझे याद है माधुरी
थकी, पसीने से लथपथ
जमीन पर पसरी
आँखों में अब भी
असंभव से ख्वाब थे
माधुरी अब कहती हो
तुम बूढा रही हो
कैसे माधुरी, कहाँ माधुरी 
देखो जहां जहाँ
तुम्हारा पसीना गिरा था
वहां वहां नयी कोपले फट रही हैं
मै यह भी याद रखूँगा माधुरी