अब फिर युद्ध,
अब फिर जागेगा जज्बा देश भक्ति का
अब फिर कफ़न ख़रीदे जायेंगे।
काफिलों की आरती होगी, पर धुंए का साया होगा,
कुमकुम के टीके होंगे, खून पर जाया होगा।
फिल्मो में सैनिक गीत गायेंगे,
मैदानों में गिद्ध जश्न मनाएंगे।
लता का गाना हर बैठक बजेगा,
मेडल से आँचल, फूलों से इंडिया गेट सजेगा।
माँ को होगा इन्तजार पदचापों का, बेटा तिरंगे में लेटा होगा,
गली गली अब चंदा होगा, उसमे भी गौरख धंदा होगा।
लहरों और हवाओं पे लाली होगी,
चेहरे पे सफेदी, आँखों में पानी होगा।
बन्दूक से निकली हर गोली गरीब की रोटी होगी,
रानी बिटिया भूखी सोती होगी।
सुन मेरे दोस्त, सुन मेरे भाई, सरहद के उस पार, उसका भी कोई रोता होगा।