Sunday, November 21, 2010

पश्चिम की तेज हवाएं , pashcim ki tej hawaaen

पश्चिम से आई तेज हवाओं ने
मछुआरों की नावे पलट दी,
और उलट दिए बुनकरों के टापरे ।
नहीं सह सकते ये अब
पूर्वी के भी धीमे थपेड़े ।
देदो देदो इन्हें, कम से कम
तिनकों के सहारे , वर्ना
महलों के ख्वाब अधूरे रह जायेंगे ।
तेज हवाओं से आग भी फैलती है
उसे फर्क नहीं मालूम
महलो और टापरों का।

Sunday, October 10, 2010

युद्ध, yuddha, War

अब फिर युद्ध,
अब फिर जागेगा जज्बा देश भक्ति का
अब फिर कफ़न ख़रीदे जायेंगे।
काफिलों की आरती होगी, पर धुंए का साया होगा,
कुमकुम के टीके होंगे, खून पर जाया होगा।
फिल्मो में सैनिक गीत गायेंगे,
मैदानों में गिद्ध जश्न मनाएंगे।
लता का गाना हर बैठक बजेगा,
मेडल से आँचल, फूलों से इंडिया गेट सजेगा।
माँ को होगा इन्तजार पदचापों का, बेटा तिरंगे में लेटा होगा,
गली गली अब चंदा होगा, उसमे भी गौरख धंदा होगा।
लहरों और हवाओं पे लाली होगी,
चेहरे पे सफेदी, आँखों में पानी होगा।
बन्दूक से निकली हर गोली गरीब की रोटी होगी,
रानी बिटिया भूखी सोती होगी।
सुन मेरे दोस्त, सुन मेरे भाई,
सरहद के उस पार, उसका भी कोई रोता होगा।

Saturday, October 2, 2010

BOOK REVIEW: The Concept of Law by H L A Hart

"I write this review from the view point of a lay reader generally interested in law, justice and political philosophy.

I found this book very lucid, well organized and comprehensive. Hart presents concept of a law in a descriptive manner as it is generally practiced. He develops the concept with comparing and differentiating it from commands and orders. He then traces its development from simple primitive societies to the complex realities of our times. He proposes that laws are union of,i) rules which govern individual behaviour and: ii) rules for making such rules.
He also discusses relationship of law with morals and cocerns of substantive versus formal justice in a legal system.

The book acknowledges prevalence of various conceptions of law in different societies but does not make any value judgement about them.

This edition contains a post script in which Hart has replied to his critics. I found this portion rather technical and think that it can be safely skipped by a general reader.

I recommend this book to any one interested in understanding cotemporary concept of law and legal system."

Sunday, July 25, 2010

स्वप्न सखी, swapna sakhi

मेरी स्वप्न सखी
तुम कभी अन्नपूर्णा न बनोगी मेरी।
अपने लिए सिर्फ परिक्रमा है
मंदिर नहीं।

बगावत, bagaawat, revolution

तम्हारे कमरे में बिछे लाल कालीन
जिनमे पांव धसने पर तुम मुस्कराते हो
इनमे मेरे बच्चों की उँगलियों का खून है।
और वो किनारे रखा फूलदान
जिसके लिए तुम फूल तोड़ लाये हो
उसे फुलाने में मेरे बच्चों के
फेफड़े सिकुड़ गए हैं।
मै खुश नहीं हूँ
और तुम भी ना होना
मैंने उनसे कहा है
अगर दम है सांसो में
तो फूलदान मत फूलाओ
बगावत के बिगुल बजाओ
और बहाना है खून ही
तो उँगलियों से नहीं
सीने से बहाओ।

लाल स्याही, laal syaahi, Red Ink

मेरे सपनो में आना छोड़ दो
मै ना मिल सकूंगा।
मैंने लाल स्याही से लिखी
किताब पढ़ ली है।

सिंहासन खाली करो, sinhaasan khaali karo

कभी किसी ने कहा था
सिंहासन खाली करो की जनता आती है ।
पर सिंहासन होगा तो राजा होगा
राजा बदलेगा राज नहीं बदलेगा
इसलिय ये सिंहासन गला दो
मेहनतकशों के औजार बना दो
उठे जुल्म के खिलाफ
वो हथियार बना दो ।
तोले जो बराबर
वो तराजू बना दो
जो झुके तराजू जुल्म की ओर
तो तराजू गला दो
उठे जुल्म के खिलाफ
वो हथियार बना दो।

डरे नहीं, लड़े, Dare nahin lade

आओ हम लड़े साथी
हम डरे नहीं लड़े साथी
मैंने माना जो लड़ते है वो मरते हैं
तुम भी मानो
जो नहीं लड़ते वो भी मरते हैं
लडाको की कहानी रेत पर नहीं
शिलाओं पर लिखी जाती है
शहीदों की उम्र सालो में नहीं
सदियों में गिनी जाती है ।

नंदीग्राम, Nandigram

नंदीग्राम अब सरहद है
सरहद पर अब समर है
बुद्ध के होंठो पर स्मित नहीं
आँखों में देखो आग है
गाँधी से कहो खंजर उठा ले
सत्य की सड़क अब लाल है
हरसूद में हारी तलवारों को
घसने का अब वक्त है
जिन्होंने उठाये थे कभी झंडे
उनके नीले खून का जवाब
मेरा तुम्हारा हमारा रक्त है ।

Tuesday, January 19, 2010

तेरे वादे, tere waade

अपने वादों की अहमियत जान
तेरी जुबाँ की क्या कीमत होगी
मैंने सहा है, और सह जाऊँगा
वो पूछेगा, तुम्हे जहमत होगी।

तेरी इक हाँ, teri ik haan

तेरी इक हाँ के लिए हमने कितनी ना सुनी
जाँ तुझे जाना पर कितनी तेरी बात सुनी।

इश्क, ishk

इश्क पर क्या करूँ कविता
बहुत कर गए ग़ालिब
ये दौर नहीं है जश्न का
चर्चा क्या हो हुश्न का।

मुहब्बत का सौदा, muhabbat ka sauda

तेरी मुहब्बत में
गैरत कभी कुछ कम सी हुई
कुछ पाने को कुछ खोने का हिसाब
अब ये महंगा लगता है.

बाइज्जत, baaijjat

उनकी बातें ना कर
सामने तेरे जो सजदा होते हैं
मुझसे मिलना है तो बाइज्जत मिल
बदले में इज्ज़त देंगे वादा करते हैं.

इश्क और इमान, ishk aur imaan

ये कौन मुंआ कह गया
इश्क में सब जायज है
हम तो मुहब्बत भी
इमान से करते हैं.

कवच, kavach

तुम कवच न पहनो
जंग लग जाएगा
तुम्हारे चेहरे पर फब्ती ओस की
उस से बनती नहीं।

तेरी हर नहीं, Teri har nahin

तुम्हारी हर 'नहीं' सीने में छुरी सी लगी
कितनी बाकी है बता दो
मै भी बची पसलियों का हिसाब कर लूँ।