पश्चिम से आई तेज हवाओं ने
मछुआरों की नावे पलट दी,
और उलट दिए बुनकरों के टापरे ।
नहीं सह सकते ये अब
पूर्वी के भी धीमे थपेड़े ।
देदो देदो इन्हें, कम से कम
तिनकों के सहारे , वर्ना
महलों के ख्वाब अधूरे रह जायेंगे ।
तेज हवाओं से आग भी फैलती है
उसे फर्क नहीं मालूम
महलो और टापरों का।
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