Sunday, October 10, 2010

युद्ध, yuddha, War

अब फिर युद्ध,
अब फिर जागेगा जज्बा देश भक्ति का
अब फिर कफ़न ख़रीदे जायेंगे।
काफिलों की आरती होगी, पर धुंए का साया होगा,
कुमकुम के टीके होंगे, खून पर जाया होगा।
फिल्मो में सैनिक गीत गायेंगे,
मैदानों में गिद्ध जश्न मनाएंगे।
लता का गाना हर बैठक बजेगा,
मेडल से आँचल, फूलों से इंडिया गेट सजेगा।
माँ को होगा इन्तजार पदचापों का, बेटा तिरंगे में लेटा होगा,
गली गली अब चंदा होगा, उसमे भी गौरख धंदा होगा।
लहरों और हवाओं पे लाली होगी,
चेहरे पे सफेदी, आँखों में पानी होगा।
बन्दूक से निकली हर गोली गरीब की रोटी होगी,
रानी बिटिया भूखी सोती होगी।
सुन मेरे दोस्त, सुन मेरे भाई,
सरहद के उस पार, उसका भी कोई रोता होगा।

6 comments:

  1. युद्ध की त्रासदी और विभीषिका का संक्षिप्त परन्तु सटीक चित्रण किया है। बहुत साधुवाद।
    आज घर मे घुस कर बैठा हर गैर जिम्मेदार नागरिक और नेता युद्ध की रणभेरी बजाने मे लगा है क्योंकि उसकी मौत का तमाशा तो नही बनेगा ये युद्ध।
    इस युद्ध पर वोट की रोटी आसानी से सिकती रहेगी।
    इन्हे कोई समझाए युद्ध आखिरी विकल्प होना चाहिए।

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  2. सत्य ऐवं मार्मिक.. अति सुन्दर

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  3. ये भावातिरेक मे जनता को बहाया जा रहा है।
    अब भी युद्ध के विकल्प की जरूरत नही है।
    इसे रोकने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए।
    हम हर मीडिया पर कोशिश करे।

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  4. बहुत बडिया विभाष।

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