Sunday, July 25, 2010

स्वप्न सखी, swapna sakhi

मेरी स्वप्न सखी
तुम कभी अन्नपूर्णा न बनोगी मेरी।
अपने लिए सिर्फ परिक्रमा है
मंदिर नहीं।

बगावत, bagaawat, revolution

तम्हारे कमरे में बिछे लाल कालीन
जिनमे पांव धसने पर तुम मुस्कराते हो
इनमे मेरे बच्चों की उँगलियों का खून है।
और वो किनारे रखा फूलदान
जिसके लिए तुम फूल तोड़ लाये हो
उसे फुलाने में मेरे बच्चों के
फेफड़े सिकुड़ गए हैं।
मै खुश नहीं हूँ
और तुम भी ना होना
मैंने उनसे कहा है
अगर दम है सांसो में
तो फूलदान मत फूलाओ
बगावत के बिगुल बजाओ
और बहाना है खून ही
तो उँगलियों से नहीं
सीने से बहाओ।

लाल स्याही, laal syaahi, Red Ink

मेरे सपनो में आना छोड़ दो
मै ना मिल सकूंगा।
मैंने लाल स्याही से लिखी
किताब पढ़ ली है।

सिंहासन खाली करो, sinhaasan khaali karo

कभी किसी ने कहा था
सिंहासन खाली करो की जनता आती है ।
पर सिंहासन होगा तो राजा होगा
राजा बदलेगा राज नहीं बदलेगा
इसलिय ये सिंहासन गला दो
मेहनतकशों के औजार बना दो
उठे जुल्म के खिलाफ
वो हथियार बना दो ।
तोले जो बराबर
वो तराजू बना दो
जो झुके तराजू जुल्म की ओर
तो तराजू गला दो
उठे जुल्म के खिलाफ
वो हथियार बना दो।

डरे नहीं, लड़े, Dare nahin lade

आओ हम लड़े साथी
हम डरे नहीं लड़े साथी
मैंने माना जो लड़ते है वो मरते हैं
तुम भी मानो
जो नहीं लड़ते वो भी मरते हैं
लडाको की कहानी रेत पर नहीं
शिलाओं पर लिखी जाती है
शहीदों की उम्र सालो में नहीं
सदियों में गिनी जाती है ।

नंदीग्राम, Nandigram

नंदीग्राम अब सरहद है
सरहद पर अब समर है
बुद्ध के होंठो पर स्मित नहीं
आँखों में देखो आग है
गाँधी से कहो खंजर उठा ले
सत्य की सड़क अब लाल है
हरसूद में हारी तलवारों को
घसने का अब वक्त है
जिन्होंने उठाये थे कभी झंडे
उनके नीले खून का जवाब
मेरा तुम्हारा हमारा रक्त है ।