नंदीग्राम अब सरहद है
सरहद पर अब समर है
बुद्ध के होंठो पर स्मित नहीं
आँखों में देखो आग है
गाँधी से कहो खंजर उठा ले
सत्य की सड़क अब लाल है
हरसूद में हारी तलवारों को
घसने का अब वक्त है
जिन्होंने उठाये थे कभी झंडे
उनके नीले खून का जवाब
मेरा तुम्हारा हमारा रक्त है ।
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