Sunday, July 25, 2010

नंदीग्राम, Nandigram

नंदीग्राम अब सरहद है
सरहद पर अब समर है
बुद्ध के होंठो पर स्मित नहीं
आँखों में देखो आग है
गाँधी से कहो खंजर उठा ले
सत्य की सड़क अब लाल है
हरसूद में हारी तलवारों को
घसने का अब वक्त है
जिन्होंने उठाये थे कभी झंडे
उनके नीले खून का जवाब
मेरा तुम्हारा हमारा रक्त है ।

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