देखो ये कौन लोग चले
चुल्लू में पानी भर
करने मरुथल पार चले ।
आँखों में सपने भर
पाने को ये चाँद चले ।
पगथलियाँ काँटों से भर
बस्ती खेत सड़क चले ।
देखो ये गुस्साए लोग चले
हाथों में अंगारे भर
घोर अमावस रात चले।
देखो ये कौन लोग चले ।
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