Sunday, July 25, 2010

बगावत, bagaawat, revolution

तम्हारे कमरे में बिछे लाल कालीन
जिनमे पांव धसने पर तुम मुस्कराते हो
इनमे मेरे बच्चों की उँगलियों का खून है।
और वो किनारे रखा फूलदान
जिसके लिए तुम फूल तोड़ लाये हो
उसे फुलाने में मेरे बच्चों के
फेफड़े सिकुड़ गए हैं।
मै खुश नहीं हूँ
और तुम भी ना होना
मैंने उनसे कहा है
अगर दम है सांसो में
तो फूलदान मत फूलाओ
बगावत के बिगुल बजाओ
और बहाना है खून ही
तो उँगलियों से नहीं
सीने से बहाओ।

1 comment:

  1. net per baithkar meine apna 5 min. bahut acchi aur sahi cheez padhne mei lagaye mujhe bahut khushi hui

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