मै एक ही राग क्यों गाता हूँ
क्यों एक ही रंग की
तस्वीर बनाता हूं ।
शायद इसलिए कि
यह राग अन्तिम राग है
जिस दिन इसके सुर लग जायेंगे
संगीत अधूरे से पुरा हो जाएगा ।
और यह रंग
जो हर रग में दौड़ता है
इसके रुकते ही
आत्मा शरीर छोड़ देती है ।
सब रंग मिलाओ तो सफ़ेद बनता है
मै सोचता हूँ
लाल नहीं मिलाओ तो काला बनेगा
भादवी अमावास सा काला।
इसलिए एक ही राग गाता हूँ
एक ही रंग की तस्वीर बनाता हूँ ।
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