मुझे कुछ करना है
पर कुछ करना क्या होता है ?
करना नहीं होता , इकट्ठे करना
सलाम के बदले सिक्के और
सिक्कों के बदले सलाम ।
करना होता है
अपनी ताकत को जोड़ना
उनसे जो कुछ करना चाहते है ।
करना होता है , तोड़ना
लम्बी दीवार और ऊंची मीनार
की छाया में बने अंधेरों को ।
आंदोलित करना शून्य के कणों को
एक सैलाब बनाना बिखरती लहरों का।
करना होता है लड़ना
अपनी आवाज को बुलंद करना , इतना
की सायरन की आवाज से दबे नहीं
और अपने सर को उठाना , इतना
की बन्दूक की पहुँच के बाहर हो जाए ।
करना होता है , रोपना
अपने आक्रोश के पौधे गाँव गाँव
ताकि गुस्से के जंगल उगें
आग लगे और दावानल बने .
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